Thursday, 2 November 2023

रहा

जमा जमा सा लहू हाड आैर नलियाें में रहा
ख़ाक फायदा झूठी तसल्लियाें में रहा..?

हम करते रहे गुप्तगू बँद कमरों में छिपे
चर्चा इश्क का मगर सारी ग़लियाें मे रहा

बन पाता या रब्ब वाे कैसे, भला आदमी
उसका पाला ही सदा जँगलियाें से रहा

आज की धूप में तपिश हाेती कहाँ..?
लुकाछिपा सा सूरज बदलियाें में रहा

बेखाैफ़ इनकाे निगल जाइए हुज़ूर...!
इक भी काँटा न इन मछलियों में रहा

वैद करता रहा पसलियाें का इलाज
मर्ज बढ़ता मग़र धमनियों में रहा

दिलाे दिमाग में लफ़्ज़ काैंधे जरूर
लिखने का दम पर न उँगलियों में रहा

गीत की धुन में ढलने लगीं सिसकियां
आभास तबले का आैर हिचकियाें में रहा
....      ...      ....  ...._मनोज मैहता

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...