Saturday, 30 September 2023

भ़्यागा डोल तरकाल़ां ह़ल्ला
छडी दे गिदड़ा तू इसा गल्ला 
शेरे दे मुखौटे लाई घ़ुम्मया
इक फुकरा कनें महादल्ला
 



 


Wednesday, 27 September 2023

वक़्त बदलोणां भ़ी ह़ै

अज का दिन घ़रोणा भ़ी ह़ै
नोआं ध़याड़ा ओणां भ़ी ह़ै,

मन्नेंया अज तिस्दी चला दी
अपण राज बदलोणां भ़ी ह़ै,

खिड़ी खिड़ी जे बड़े ह़स्सा दे
डुसकी- डुसकी रोणां भ़ी ह़ै,

पराले दा लगणां जदूं गोच्छा
तदूँ माह़णू पणछोणां भी ह़ै, 

चूंडिया चढ़ी फणसो मत बो 
अखीर बुन्नें जो लोह़णां भ़ी ह़ै, 

एह़ सरीर तां ह़ै रुह़ा दा चोल़ा
'मैह़तेया' इन्नीं छकोणां भ़ी ह़ै ।।




Tuesday, 26 September 2023

गुजश्ता दौर

गुजश्ता दौर के  ढेर में से  खंगाली हैं
तमाम यादें  मैंने ज़हन में  संभाली हैं

अंदाज़ अपने पर  यूँ तो नाज़ है मुझे 
पर उसकी अदाएं बड़ी ही निराली हैं

ऐ चारागर  बता तू कैसे भर देगा इसे
नामुराद दिल के चारों खानें खाली हैं

दस्तख़तों को  बार बार देखते क्यूँ हो
ये चैक व चैकधारी दोनों ही जाली हैं

चंद यारों ने धोखे से भोंकी जो पीठ में
मैंने वो सब छुरियां खुद ही निकाली हैं

संभाली हैं

गुजश्ता दौर के  ढेर में से  खंगाली हैं
तमाम यादें  मैंने ज़हन में  संभाली हैं

अंदाज़ अपने पर  यूँ तो नाज़ है मुझे 
पर उसकी अदाएं बड़ी ही निराली हैं

ऐ चारागर  बता तू कैसे भर देगा इसे
नामुराद दिल के चारों खानें खाली हैं

दस्तख़तों को  बार बार देखते क्यूँ हो
ये चैक व चैकधारी दोनों ही जाली हैं

चंद यारों ने धोखे से भोंकी जो पीठ में
मैंने वो सब छुरियां खुद ही निकाली हैं

भ़णोआ कनें बुआई

अक्कड़ इन्ह़ाँ दा गह़णा कन्नें रुस-रुसाई जी
जाह़्लू दिख्खा ताह़्लू छडदे नक्क फुलाई जी

मत्थे पायो तरूठ कद्दी नीं ऐ बोलदे ह़स्सी नें 
इन्ह़ाँ जो खुश करने जो देइये कुण दवाई जी

सूतक- पातक दू़ँ जो इक बरोबर समझ़न ऐ़
ऊच्चा सरैह़णा चाह़िदा कनें नरम तुलाई जी

पुठ्ठे सवालाँ पुछदे कनें गल्ल कब्बली घ़ोचदे
जागत-बिट्टियां दी लग्गे जदूँ दिख-दखाई जी

अप्पू गलाई लैंदे म्ह़ारा मजाक कद्दी नीं सैह़ंदे
सदा जल़यो ह़ी दिख्खे भ़णोआ कनें बुआई जी

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...