Friday, 28 June 2024

उतर गया हूँ मैं

तेरी आँखों की झील में उतर गया हूँ मैं
डूब ही जाने दे अब चूँकि मर गया हूँ मैं

लहू छलक छलक के मु़ंह हुआ है लाल
तुझे क्यूँ लग रहा है कि संवर गया हूँ मैं

उम्र ने दिखावटी यूँही ला दी है शराफत 
हर्गिज़ ना यारों जरा भी सुधर गया हूँ मैं 






Tuesday, 25 June 2024



सदा सुनहरी आज की ये तारिख रहे
जन्मदिन तुम्हें यूँ  हर सू मुबारिक रहे

खत्म हों  सदा के लिए ये कशमकशें
हम संग संग अब तो ताउम्र बस हंसें

फला फूला रहे तिरा बाग ओ बागवाँ
रब्ब भी तुझ पे रहे अब सदा मेहरबां 

हरिक के सुख-दुख में  तू  शरीक रहे 
जन्मदिन तुम्हें बस यूँही मुबारिक रहे 





Time

When we want it to stop it flies
When wish it should fly it crawls



Friday, 21 June 2024

चट्टणां

थुक्की ने नीं चट्टणां मितरा
यमराजें नर्कें सट्टणां मितरा

तेरी उह़िंयां  किस्मत खुल्ली
जे बटणा सैह़ खट्टणां मितरा

तिस पर लप्प बधाणी कैह़्जो
पच़ाह़ँ पौये जे  ह़ट्टणां मितरा

क्लोनैज़िपाम रख खीसे बिच 
दिलें  फिरी ह़ै  घ़ट्टणां मितरा

जित्तणां क़ पल्लें ह़ोये दीय्या
तित्तणां ह़ी  रूँ बट्टणां मितरा

जेह़ड़ा निभाएं तिज्जो ने पूरा
तिस छड्डी नीं न्ह़ठणां मितरा






भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...