Saturday, 19 July 2025

कुछ लोक

कुछ लोक नीं समझदे प्यारे जो
बस मितरी करदे गुजारे जो 
कुछ लोक ह़ुंदे भ़ले माणस
जेडड़े हथ बधांदे सह़ारे जो
कुछ ह़ुंदे जेह़ड़े समझकार 
सैह़ थमदे रिश्तेयां दे भ़ारे जो 
कुछ ह़ुंदे ह़ैन पूरे बाज्जड़
जेह़ड़े पतल़ा करदे गारे जो

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...