बस मितरी करदे गुजारे जो
कुछ लोक ह़ुंदे भ़ले माणस
जेडड़े हथ बधांदे सह़ारे जो
कुछ ह़ुंदे जेह़ड़े समझकार
सैह़ थमदे रिश्तेयां दे भ़ारे जो
कुछ ह़ुंदे ह़ैन पूरे बाज्जड़
जेह़ड़े पतल़ा करदे गारे जो
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...