Saturday, 29 August 2015

Is it real democracy??

वर्कर तो भयग्रस्त हैं, नेता लोग मस्त हैं
अफसरों की मौज है और जनता त्रस्त है

चाहे हो काँग्रेस, हो चाहे फिर  भाजपा
सरकार हिमाचल की मिलाजुला ट्रस्ट है

असली नकली की परख नहीं हुज़ूर को
बढ़ता ही जा रहा दोनों तरफ अनरैस्ट है

अपनें विधायक का पूरा विरोध कीजिए
डरनें की चिंता नहीं, साब का इन्ट्रेस्ट है

एक आध मन्त्री जो काम ठीक कर रहा
उसके बढ़ते भाव से, सी एम को कष्ट है

जम्हूरियत के मायनें लगता है बदल गए
जमानत न बचा सका, वो निगम अध्यक्ष है

जोड़ जुगाड़ करनें में पूरा जो दक्ष हो गया
प्राँत का प्रधान मित्रो,आज वो ही शख्स है 

  .................मनोज मैहता....................

Himachali -phrases

छ्ड्डी देया बेह़लियाँ चौध़राँ, ह़ुण दिन इह़ियाँ नी सध़रोणें बजाजिया दे घ़ाटे मितराे , पकौड़याँ बेच्ची पूरे नीं ह़ोणें

भ़ार जरा ता सैह़णां पोणाँ, भ़ौएँ बसौं बिच लैणाँ पोणाँ
बाल़ाँ फूकी नें कद्दी भी यारो, मुऱदे तां हल्के नीं ह़ोणें

कोड़ा तेल ह़ी लैंदा ओयाँ, डालडे तेजे परेह़्ज ह़ै तिज्जो
मन्याँ ह़ुँग्गे डौक्के ह़ी एह़, थुक्के बिच ता तल़ी नीं ह़ोणें

इस घ़राटे देया ह़ी दल़ूणाँ, पींह़्ण कद्दी पर नीं बदलूणाँ
सुण गप्प थौह़े नें मेरी, मन्याँ ह़ल्ली कन्न ह़ोयो नीं टौणें

अन्ह़ाँ नाँह़ं करदा रेह़या कनें बौल़ा गाँह़ं करदा रेह़या
बमार मरीजें ठीक न होंणाँ, लख करा भ़ाएं जादू-टोणें

किछ कम्म कमा कर मोआ, बेह़ले रह़ी तैं बणनाँ गोह़ा
जेह़ड़े तू खराब करा दा, एह़ पल बापस कद्दी नीं औंणें
------------------------मनोज मैहता ------------------------

Thursday, 27 August 2015

Weird lover

तस्वीर अपनें महबूब की, गर्दन सें टाँग कर
वो रोता रहा उसके लिए, बद्दुआएँ माँग कर

वो शख्स था अजब, उसकी हरकतें गज़ब
इश्क़ किया उसनें, सब हदों को लाँघ कर

न जानें क्या बात थी, उस हस्ती अज़ीम में
खुद को रख दिया हमनें, उसीसे बाँध कर

छिप जा जरा बादलों की ओट में दो घड़ी
हम पे इतनी मेहरबानी, तू आज चाँद कर

My young comrades

I have some dreams to make true
Have the potential to channelize too
Poor and down trodden are my worry
To help them properly I need you

o my young friends walk with me
I assure all obstacles shall be through
let's walk hand in hand, you fall I'll stand
you shall be me and I shall  be you

They are handful who criticize me
There must be some, to differ our view
They conspire also and perspire too
they're feared as my strength are you

Wednesday, 26 August 2015

History repeats itself

बड्डी भ़ारी बह़स थी छिड़ियो
इसा गप्पा पर पिछलिया सँझ़्झा
म्हाचले दा मुख्यमन्त्री बणंना
इस बरिया भ़ी कोह़की गँजा

दिंदे रैंह़ सैह़ बड़ियाँ दलीलाँ
बेह़लियाँ पाई छड्डियाँ लीलाँ
इबकिया इत्थु भी औंणीं 'आप '
खिड़णां फुल्ल न सुझ़णां पँज्जा

Tuesday, 18 August 2015

Dark night and your memories

न्ह़ेरिया रात्ती मिंज्जो ख्याल तेरा ओआ दा
पल़्साटयाँ मारी जादा मैं कन्नें दिल रोआ दा

जालकणां दिख्या तिज्जो, मेरी एह़ी ह़ाल ह़ै
न भ़ुख रह़ी न निन्दर, खबन्नीं क्या ह़ोआ दा

अाैवाज तेरी मिट्ठी मेरे कन्नाँ बिच बज्जा दी
काह़ल़ी कनें ह़ोल, मेरे काल़जे च पोआ दा

जित्तणाँ मर्जी तड़फाँ, तिज्जो फर्क नीं पोंदा
मँणें दा बट्टा मिंज्जो छातिया पर बझ़ोआ दा

Monday, 17 August 2015

I love you and die for you

मिंज्जो तिज्जो नें प्यार ह़ै, तिज्जो पर मरदा
बुरा न तू मन्नीं जाए अपण इसा गल्ला डरदा.....
तिज्जो पाणें ताईं मैं, लख घ़डियां तरकीबाँ
पर जाह़लु नेड़े औंदी, सब भ़ुली चलदा....
मिंज्जो तिज्जो नें................................ ।।

रात्ती भी ताँ सुप्नयाँ च तूह़़ी मिंज्जो सुझ्झ़दी
बडियाँ भ़ारी गप्पाँ ताह़लु तिज्जो कन्नें करदा
यार कार सब मेरा मखौल ह़ी उड़ाँदे रैह़ँदे
रत्ती भी नीं तिन्ह़ाँ पर जोर मेरा चलदा...
मिंज्जो तिज्जो नें............................... ।।

इक बरी मड़िये तू ह़स्सी करी दस्सी देयाँ
मेरे मनें दिंयाँ जरा, ताराँ तू कस्सी  देयाँ
काल़जुए मेरे पाई, जरा जायाँ ठँड मिये
पूरी जिंदगी तेरी, चाकरी मैं करगा........
मिंज्जो तिज्जो नें............................... ।।


Sunday, 16 August 2015

You are Adam not God

इतनी कठिन तो यह राह नहीं
पर चलनें की अब चाह नहीं

क्यों फिरता मैं रहूँ मारा मारा ?
जो किसीको मेरी परवाह नहीं

तय है कि यह किश्ती डूबेगी!
है इसका कोई भी मल्लाह नहीं

क्या बाँध बनेंगा इस नदिया पर
पानी का ही जिसमे प्रवाह नहीं

नाहक ही करते हो माथापच्ची
मानेंगा वो कभी तेरी सलाह नहीं

जमीं पर उतर आ, मान भी जा
आदम ही है तू अल्लाह तो नहीं

Don't do evils

दुनिया की चहल -पहल यह, जहान की ये रँगतें
शरीफों के लायक कहाँ, इन लम्पटों की सँगतें

मन में ही दबके रह गईं, हमारी बेचारी हसरतें
सरेआम पार कर गए वो, बेहूदगी की सब हदें

मुश्किल से उसे तलाशा था,रातदिन तराशा था
पत्थर अब हुआ ख़ुदा, हमें मिली बस तोहमतें

पहचानता हमें नहीं यूँ निकल गया वो करीब से
क्यूँ कर उसे आवाज़ दे, कैसे करें हम मिन्नतें

हमसे ज्यादा परेशाँ तो अल्लाह है सब देखकर
मिटी उसकी भलाईयाँ तो हारी उसकी मेहनतें

एै इंसान अब भी वक्त है , छोड़ गँदी ये फितरतें
सबको मिटाके रख देंगी, तेरी नापाक हरकतें

Saturday, 15 August 2015

Don't indulge in- gambling

सीप्पा ते तू खेलना सिख्खया फिरी सिख्खी तैं लम्मीं मुआ
फिरी कौंक्का लग्गा खेलणाँ, हुंण फ्लैसा च आई मणसुआ

बुरे एैब तैं झ़ट लै सिख्खी, गप्प अक्ली दी कोई नीं दिख्खी
पाईये फट पणछोई जाँदे, ह़ौर नीं सुझ्झ़दा तिज्जो दुआ

भ़्यागा ह़ी स्कीमं बणाणाँ लग्गदे, मोबाइलाँ ठणकाँणां लग्गदे
खड्डा बख्खें कि डोडण टयाल़ुएँ, कुथकी मेयो झ़ट कठरुआ

नीं जाणाँ अरो मैह़ते अल्ल़ी, मत्ती काढ सैह़ लैंदा कढ़ढ़ी
जुआरी सारे ह़ोई जाणें खाली, मुकी जाणाँ नगरोटें जुआ

फार्में भी नीं जाणाँ मितरो अज्ज बैह़ँदे पिंट्टे दिया बोह़ड़ी
मैं छोट्टुये ते लई औंदा तास्साँ, तुसाँ रति की ता ठसरुआ ।
-------------------------मनोज मैहता -----------------------

Thursday, 13 August 2015

Betrayed -not-Shattered

आपनें तो सचमुच बड़ा ही, ज़ुल्म मुझपे यार किया,
जगाये ख़ुद अरमाँ मुझमें, फिर शर्तों पर प्यार किया ।

झूठे वायदे-झूठी कसम,बड़ी खास है तेरी यह अदा,
खाये धोखे मैंनें बारहा और फिर भी इँतजार किया  ।

मैं तड़पता कसमसाता हूँ और सोचता भी जाता हूँ ,
क्या ख़ता थी मेरी जो मुझे, बेवजह बेकरार किया  ।

है यकीँ मुझे तेरे चाहवान, शहर में और भी हैं बड़े ,
पर महज़ मैं ही एक हूँ, जिसनें तेरा एतबार किया  ।

उड़ाओ जी भर के मज़ाक,कसो और तुम फब्तियाँ ,
हूँ मगर बस एेसा ही मैं, जो भी किया बेशुमार किया

Friday, 7 August 2015

A village ruined by rain

बरखा दा देह़या तराड़ प्या , रूढ़ी सारा नराड़ गया
फिल्लाँ हँड्डंन अँग्गणें द्वारें, चौंनीं पास्सयाँ रँगाड़ प्या

कुरला बैंह़दे ह़ी आया रँग्गे, टिरे ल़्ह़ाह़ ता बैठ्ठे डँग्गे
बंडेर -जौगल़ पिंयाँ बृकटी ,खिड़ी खिड़ी पर प्ह़ाड़ प्या

नल़ौऊआँ दे घ़र गै दबोई, लुह़ाराँ दी मेयो चुड़ी रसोई
चाह़ंगाँ दा ह़िलकेरया छप्पर, राह़ड़ाँ दा ता लाह़ड़ गया

नाल़ू बगया बिच सड़का दे,साकड़याँ नें  किंह़ियाँ जाणाँ
घ़रघ़याल़ू बुरे दौंलैं डरयो, उआरैं पारें सींह़ नाल़ प्या

खड़पे -सन्चूड़ गुस्से ह़ोयो, घु़ग्घ़ किछ चतन्न ह़ुण होयो
छाँगणाँ किंह़िंयां डर लगदा, कबल्ला चढ़ी एै़ बाड़ गया

Marriage of foxes - the Kangra

च्मक्या सूरज बरखा भी लग्गियो, सिज्जणें दा मिंज्जो चा लग्गया
तुसाँ भी मजा लई ल्या मितरो, गिद्दड़ -गिद्दड़ियाँ दा ब्याह़ लग्गया

किंणियाँ पँज- सत्त पई जे गिंय्याँ, नीं लग्गयाे मरियाे तुसाँ गल़णां
सुत्थुणूँ इह़ियाँ छूँह़गी लै मड़याँ, डुब्बणाँ जणता पूरा गराँ लग्गया

रेट्टा मुँन्ड्डे पर लाड्डो चुक्कया , लुक्की लुक्की सब दिख्खी जा दे
टिरया इक पूल्ला रेट्टे ते जे, मिंज्जो ह़त्थ लोआणें दा दा लग्गया

ह़ाखीँ चुक्की जे तिन्नें दिख्खया, रुकणाँ ताह़लु मेरा साह़ लग्गया
ढरूई ढरूई सब छौरू दिख्खा दे, बद्धणाँ मेरा भी  भ़ाअ लग्गया





Thursday, 6 August 2015

Drink less-or-you'll be dead

काह़ल़ी होल छल़ाका भी ह़ै
तबीता बिच मतल़ाका भी ह़ै

कद्दकी ढिड्ड फटी फटी जाँदा
लगदा कद्दी म्यो फाका भी ह़ै

इस बख्खे जे पइयो मरणीं
गुआँडें धूम- ध़ड़ाका भी ह़ै

दिनें जे बड़याँ भ़जनाँ गाँदा
रात्ती मारदा डाक्का भी ह़ै

ह़ड्ड गोड्डे ह़ी नीं हैन्न छलोयो
पिट्ठी लग्गया मसाका भी ह़ै

जँग्घाँ पिल़ची चल्लियाँ मोआ
मुँह़े चल्लया भ़ौआका भी ह़ै

घ़ट्ट पिय्या कर म्या मैह़त्तया
ह़ोणाँ कद्दी ढल़ाका भी ह़ै
........मनोज मैहता........

Wednesday, 5 August 2015

Moon-and-my-beloved

डकदे तिज्जो राह़ु- केतु , भ़ाऊ तिसा दे करन तमासा
दोआ तुहाँ ह़ैन्न इको दयै , कद्दकी तौल़ा कद्दकी मासा

ह़ोल पौंदा दूह़ँनी दिख्खी, इक गल्ल अपण मैं सिख्खी
दूरे ते ही ह़स्सदे हैन्न दोयो, रेड्डे आई नीं दिंदे दलासा

तैं मूसी लई लौ सूरजे दी, सैह़ लई गई मेरे चैनें खोई
मौके पर नीं मिलदे दोयो,जितणा मर्जी चाह़े तलासा

चाँद ता रैह़ंदा अँबरे उप्पर सैह़ ता ध़रतिया ह़ी बसदी
दूँह़नीं च पर सौंणां कुण ह़ै कैंह़ नीं करदे तुसाँ खुलासा

Tuesday, 4 August 2015

To- all -Himachlis -in-Himacal-India -or -abroad

We all are called Himachlis or Pahadis in other parts of India particularly in Punjab, Haryana, Delhi and parts of Utter Pradesh.
  Despite our cultural and linguistic variations we are collectively termed Highlanders and are thought to be very innocent, honest but backward group of People.
  We ourselves try to hide our identities outside our state in a pseudo  fear that we would be underrated and estimated. We pretend not having noticed a person who is well known to us just for such reasons.
We must be proud that first PVC was honoured to a Himachli in 1948. It was due to the most sincere efforts of a Himachli that Jammu and Kashmir state could be merged in India. We must be very proud to two of them i.e. Major  Somnath Sharma and Justice Mehar  Chand Mahajan.
   We should also know that we have been mentioned in the oldest epics and the Katoch dynasty is considered to be the oldest ruling dynasty in the world. When people in Europe and other parts of world lived like gypsies our ancestors lived a civilized life. After greatest destruction due to floods Manu with his boat and life stock had laid down the foundation of  Manali from where the life spreaded to other parts.
  We try to avoid speaking in our local dialect for unknown reasons and fears .
Our new generation is forgetting our language as we don't allow them to speak it.
I want to remind you the words of a patriot... Mother and motherland are more lovable than even heaven. So how could we humiliate the language of our mother and motherland.
Let's spread this message  that we will always be connected to our roots and love and use our mother tongue Pahadi atleast inside our houses, where ever we live, work or pull our lives.

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...