Friday, 7 August 2015

Marriage of foxes - the Kangra

च्मक्या सूरज बरखा भी लग्गियो, सिज्जणें दा मिंज्जो चा लग्गया
तुसाँ भी मजा लई ल्या मितरो, गिद्दड़ -गिद्दड़ियाँ दा ब्याह़ लग्गया

किंणियाँ पँज- सत्त पई जे गिंय्याँ, नीं लग्गयाे मरियाे तुसाँ गल़णां
सुत्थुणूँ इह़ियाँ छूँह़गी लै मड़याँ, डुब्बणाँ जणता पूरा गराँ लग्गया

रेट्टा मुँन्ड्डे पर लाड्डो चुक्कया , लुक्की लुक्की सब दिख्खी जा दे
टिरया इक पूल्ला रेट्टे ते जे, मिंज्जो ह़त्थ लोआणें दा दा लग्गया

ह़ाखीँ चुक्की जे तिन्नें दिख्खया, रुकणाँ ताह़लु मेरा साह़ लग्गया
ढरूई ढरूई सब छौरू दिख्खा दे, बद्धणाँ मेरा भी  भ़ाअ लग्गया





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