Saturday, 15 August 2015

Don't indulge in- gambling

सीप्पा ते तू खेलना सिख्खया फिरी सिख्खी तैं लम्मीं मुआ
फिरी कौंक्का लग्गा खेलणाँ, हुंण फ्लैसा च आई मणसुआ

बुरे एैब तैं झ़ट लै सिख्खी, गप्प अक्ली दी कोई नीं दिख्खी
पाईये फट पणछोई जाँदे, ह़ौर नीं सुझ्झ़दा तिज्जो दुआ

भ़्यागा ह़ी स्कीमं बणाणाँ लग्गदे, मोबाइलाँ ठणकाँणां लग्गदे
खड्डा बख्खें कि डोडण टयाल़ुएँ, कुथकी मेयो झ़ट कठरुआ

नीं जाणाँ अरो मैह़ते अल्ल़ी, मत्ती काढ सैह़ लैंदा कढ़ढ़ी
जुआरी सारे ह़ोई जाणें खाली, मुकी जाणाँ नगरोटें जुआ

फार्में भी नीं जाणाँ मितरो अज्ज बैह़ँदे पिंट्टे दिया बोह़ड़ी
मैं छोट्टुये ते लई औंदा तास्साँ, तुसाँ रति की ता ठसरुआ ।
-------------------------मनोज मैहता -----------------------

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