Thursday, 29 December 2016

सुणां जी ... !! !!

केवलुए जो मेजरे नें घुल़ाँदा, सुरेशेे पिच्छे कौशले लाँदा
अप्पु बणदा चिट्टा चल़ेरा, ह़ोरनी जो काल़ी भ़ेड गलाँदा

जेह़ड़ा नेता बध़णा लग्गे, इस बिच नुक्साँ कढणां लग्गे 
तिस्दयाँ बागियाँ तोपी तोपी, मूड़े अपणें बिच बठियांदा

सारे डग्ग इन्नीं मुँह़ें लायो तां खरे खरे वर्कर खुड्डें लायो
दूँ दूँ लख्खाँ नें ह़ारयो जेहड़े, तिनां जो चेयरमैन बणांदा

कम करदा डिक्टेटरे साह़ीं, कुसी दी नीं सुणदा सणांदा
घ़ोड़यां ते तारी कईयाँ जो खोत्तयां पर भ़ी एह़ बठियांदा

कद्दी चंद्रेशा कद्दी विद्या पर, ह़ुण बालिये पर तीर चलाँदा
अप्पु ह़ै एह़ काल़ा भेड्डु, ह़ोरनी जो काल़ी भ़ेड गलाँदा

गध़यां पर बेह़्ई खुस ह़ोयो, दै़ नौल़ भी किच्छ कठरोयो
चौबिंहाँ साल्लां दे पुत्रे दे, सैह़ जबरयाँ ते पैराँ बँदौआंदा

छडी देया इद्दे खेह़ड़े मितरो, बड़े खलड़ू इन्नीं पेड़े मितरो
ह़िमाचले देयो भ़लयो लोक्को, फारका ऐह़ी गप्प गलाँदा

सुखराम जी इन्नीं फसवाये, सत मह़ाजन भी तां हरवाये
साजशाँ रचदा सबनीं खलाफ कनें बड्डा कांग्रेसी कोह़ाँदा

बोलदा उह़ियां मैं नीं कद्दी ह़ारया, ह़र छोटा- बड्डा मारया
रामलाल जी दी याद दोआईये फिरी झट चुप ह़ोई जाँदा

बणदा बड्डा अजीत बिह़ारी, अपणीं लाड़ी दो बरी ह़ारी
ह़ाखीं दस्सिये ता फट कम्बदा, जरकयाँ जो बड़ा डराँदा

Tuesday, 27 December 2016

गीदड़ का मुखिया ही होने वाला ढेर है

रूको जी बस गिनेचुने दिनों का फेर है
गीदड़ का मुखिया ही होने वाला ढेर है

ईश्वर की लाठी की, आवाज़ नही होती
उसके घर में देर सही पर नहीं अंधेर है

बच्चों सी हरकतें व  कायराना फितरतें
वह मेंडक नही महज़ 'कुएँ' की मुंडेर है

कुटिल सी मुस्कान  'ओ गधे' पहलवान
वाह! कैसा शिगूफा छोड़ा कि 'तू' शेर है

दौड़ता है यह सरपट  बदल कर करवट
वक्त बतायेगा कि तू तीतर है या बटेर है

मेमना ख़ुद को शेर है पुकारता .. !!

कितनी बड़ी शेखी है  बघारता
मेमना ख़ुद को शेर है पुकारता

ईमानदारी का चोला ओढ़ कर
करोड़ों की जमीनें है डकारता

गीदड़ जैसी करके चालाकियाँ
बेगाने माल पर  हाथ है मारता

भगौड़ा एक जी 'कीर-ग्राम' का
दूसरों के कँधों पर  ललकारता

भोले धर्मशालियों को ठग कर
रिश्तेदारों के 'मुकद्दर' संवारता

तेरा रहनुमां ग़र होता 'काबिल'
तो एक भी पिछलग्गु न हारता
                    .. मनोज मैहता

Monday, 26 December 2016

न आना उसके बहकावे में .. !! !!

साज़िश की बू आती है उसके मन्नोवल और बुलावे में
देखना फिर से न आ जाना उस शातिर के बहकावे में

ये दिलकश मुस्कुराहट, ये मासूमियत या लड़खड़ाहट
भूल से भी मत फंसना  उसके नुमायशनुमा दिखावे में

हमसे मिलना ज़रूरी ही है तो बड़े शौक से आ जाईये
हम होंगे या तो मय-खाने पर या मिलेंगे फिर ख़राबे में

कहना तो बहुत कुछ चाहा  पर बात नहीं जी बन पाई
आवाज ही अपनी दब गई  उस कातिल शोर शराबे में

अल्लाह तो ऐ काफ़िर  तेरे दिल के भीतर ही बसता है
उसको कहाँ ढूँढता फिरता है जाकर काशी या काबे में
                                                     .. मनोज मैहता

Sunday, 25 December 2016

रणभेरी .. .. !! !!

धृतराष्ट्र की अनैतिक औलाद
करके ही रहेगी उसको वर्बाद

बना हिमाचल लो हस्तिनापुर
फैल चुका  दिमाग तक मवाद

अर्जुन को रोकने की कोशिशें
अपना गणित या मूर्खी हिसाब

धर्मशाला जब बना है कुरुक्षेत्र
नगरोटा है पांडवों का शंखनाद

बज उठी हैं तीक्ष्ण रण-भेरियाँ
कायर स्वयंमेव करेंगे आंतर्नाद

कांपते हाथों से  फैंकी गोटियाँ
द्यूत क्रीडा में भी खायेगा मात

सत्ता के नशे में पूरा अँधा हुआ
दो राज घरानों का बूढ़ा दामाद

षडयंत्रो से नही होगी हार-जीत
हम तो मारकाट को हैं आज़ाद

उठा गांडीव अचूक तू प्रहार कर
त्रिगर्त फिर जो करना है आबाद ||

Tuesday, 20 December 2016

हम बाली के काम पे माँगेंगे... !! !!

जाति के नाम पे माँगेंगे पाति के नाम पे माँगेंगे
कभी तो सुबह पर माँगेंगे  कभी शाम पे माँगेंगे

बहलाते- फुसलाते फिरें  फर्क नही पड़ता यारो
निश्चय पक्का है अपना  हम तो काम पे  माँगेंगे

बातों को सुनते आना पर  यह भी समझा आना
उनके जैसे और भी हैं जोकि बस जाम पे माँगेंगे

जज़्वातों में नही बहते, चँद ऐसे लोग भी हैं रहते
जो भी करना हैं करें वो हम इसी पैग़ाम पे माँगेंगे

उनका नाम चलाने में  महफ़िलों में मय खानों में
जो लिखा और बोला है उस ही कलाम पे माँगेंगे

उनको भी चाहियें वोट पर नीयत में ज़रा है खोट
कई हथकंडे अपनायेंगे, या वो इल्ज़ाम पे माँगेंगे

Monday, 19 December 2016

आपके हालात की मौज ले रहे हैं .. !!

कितनी गलत सोच है कि मुश्किलों का बोझ ले रहे हैं
असल में कुछ लोग आपके हालात की मौज ले रहे हैं

बैठे ही थे वो इसी तलाश में कि हंगामा तो कहीं बरपे
जायज़ा सुबह-दोपहर-शाम आपका तो रोज ले रहे हैं

नुकसान इसका होगा किसे  यह भी काबिल-ऐ-गौर है
इस चीज की भी मेरे यारो  क्या तनिक खोज ले रहे हैं

मतलब परस्त चंद, जो मँडरा रहे है इर्द-गिर्द इन दिनो
पता है मुझे भी सब कुछ  कि क्या क्या लोभ दे रहे हैं

तेरा फ़र्ज़ है आगाह करना  कि जागो और काम करो
बहुत हसीन ख़्वाब लोग  इन दिनों ऐ मनोज ले रहे हैं ||

Tuesday, 13 December 2016

हमें बेवफ़ाई नही आती .. !! !!

सब चीज आती है हमें पर बेवफ़ाई नही आती
हर बात दिल की पर ज़ुबाँ पर लाई नही जाती

तेरी ज़फा का ज़िक्र ख़ुद बता किससे करें हम
हमसे ऐसी आग-ओ-हवा भड़काई नही जाती

रिश्ते की इस नाज़ुक डोर को उलझने ना देना
फिर ता उम्र ऐसी सिलवटें सुलझाई नही जाती

माना कि हसीन दौर में  दाखिल तुम हो गये हो
पर अतीत के सायों से  जान छुड़ाई नही जाती

वक्त के साथ कुछ यादें धुंधला सी तो जाती हैं
खरौंचें जिगर की सारी मगर मिटाईं नही जाती

कहने को यों तो 'मनोज' तू बनता है बड़ बोला
पते की बात तुझ से कोई पर बताई नही जाती

यह इश्कबाज़ी ख़ुद कम्बख्त सीखनी है पड़ती
मदरसे में तो यह तालीम  सिखलाई नही जाती
                                          .. मनोज मैहता

मदरसे में यह तालीम सिखाई नही जाती.. !! !!

सब चीज आती है हमें पर बेवफ़ाई नही आती
हर बात दिल की पर ज़ुबाँ पर लाई नही जाती
तेरी ज़फा का ज़िक्र ख़ुद बता किससे करें हम
हमसे ऐसी आग-ओ-हवा  भड़काई नही जाती
रिश्ते की इस नाज़ुक  डोर को उलझने ना देना
फिर ता उम्र ऐसी सिलवटें सुलझाई नही जाती
माना कि हसीन दौर में  दाखिल तुम हो गये हो
पर अतीत के सायों से  जान छुड़ाई नही जाती
वक्त के साथ कुछ यादें  धुंधला सी तो जाती हैं
खरौंचें जिगर की सारी  मगर मिटाईं नही जाती
कहने को यों तो 'मनोज' तू  बनता है बड़ बोला
पते की बात तुझ से कोई  पर बताई नही जाती
यह इश्कबाज़ी ख़ुद  कम्बख्त सीखनी है पड़ती
मदरसों में तो यह तालीम  सिखलाई नही जाती
                                           .. मनोज मैहता

Monday, 12 December 2016

प्रिय बंधु/बहन
                      .. जय हिंद
जैसा कि आप सभी को विदित है कि दिनाँक 8 दिसम्बर 2016 को मेरी पुत्रवधु भूमिका व पुत्र रघुबीर बाली आपके प्रिय जानू के यहाँ एक नन्हें मेहमान का आगमन हुआ है जिससे मुझे दादा बनने का सौभाग्य उपहार के रूप में प्राप्त हुआ है|  नवजात शिशु व मेरी बहू ईश्वर की अनुकंपा व आपकी दुआओं से बिलकुल स्वस्थ हैं |
  .  मैं या मेरा परिवार आज जिस मुकाम पर हैं उसमें आपका अतुलनीय सहयोग व कृपा रही है| आप हर सुख दुख में मेरे साथ चट्टान की तरह खड़े रहते हैं |
मेरे परिवार का कोई भी कार्य आपकी उपस्थिति व शुभ कामनाओं के बिना सम्पन्न नही हो सकता |
..अत: मैंने दिनांक 25 दिसम्बर 2016 को इसके मद्देनज़र अपने पौत्र का नामकरण संस्कार नगरोटा बगवां(गाँधी ग्राउँड) में आपकी मौजूदगी में करने का निर्णय लिया है |
.. आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि इस अवसर पर निम्न कार्यक्रमानुसार पधार कर व मेरे पोते को स्नेहिल आशीर्वाद देकर मेरे पूरे परिवार को कृतार्थ करें
                                                     .. भवदीय
                        .                     
                                               . जी.एस.बाली

कार्यक्रम :

रविवार , 25 दिसम्बर . 11 बजे  नामकरण संस्कार
                                 12 बजे  सांस्कृतिक कार्यक्रम
                  12:30- 3:30 बजे   प्रीति भोज

छोटी सी बात .. !! !!

छोटी सी बात देखिये बेवज़ह बड़ी कर डाली है
अपनी जिम्मेवारी आपनें बेहतर वैसे संभाली है

हक़ तो हमें भी है मिला कि करें तुम से ये गिला
नाहक़ ही क्यूँ हरीफ़ों की औकात बढ़ा डाली है

मरते हैं तेरे कहने पे कुछ उनके पास भी रहने दे
मौका-परस्तों नें कैसे आसपास भीड़ जुटा ली है

हम तो ठहरे तेरे ज़ाहिद बने रहेंगे हर सू कासिद
मगर न जाने क्यों तूनें ख़ुद हमसे दूरी बढ़ा ली है

चँद बिना कुछ किये हुये बैठे हैं ऊँची मीनारों पर
अपनी तो टूटी थाली है  तो टूटी हुई ही प्याली है

                                            .. मनोज मैहता

Sunday, 11 December 2016

Materialism has won

This is materialistic world,
your emotions matter least
even to find enough space,
you've to become a beast
One is measured by money,
loyalty-qualities count least.
Wanna shine in torn clothes,
forget such stupidity at least.
Contentment is astonishment,
they'll gulp you as their feast.
Oligarchy has built it's temple
with leader as it's head priest
poor you need not be worried,
You'll be amputated like cyst

Saturday, 10 December 2016

मुकद्दरों के सहारे .. !! !!

मुकद्दरों के सहारे कितने दिनों तक चलते रहोगे यार
बेगाने माल पर क्या उम्र भर ही तुम पलते रहोगे यार

अपनी हस्ती पर यकीं करके हो जाओ ज़लबाफरोश
दूजे के जलबों से आखिर कब तक छलते रहोगे यार

इक बार तो सीना ठोंककर उनसे आँखें मिलाओ तुम
क्या ज़िंदगी भर ना मुराद दुश्मनों से टलते रहोगे यार

चुभती बातों को हँसी की फ़ज़ाओं में उड़ा दिया करो
इन्हीं आतिशी अल्फ़ाज़ों में नहीं तो जलते रहोगे यार

मौका जब सुनहरी मिल जाये तो भुना भी लिया करो
वक्त निकल जाने के बाद फिर हाथ मलते रहोगे यार

कभी तो इरादों अरमानों की कड़ाही में तेल डाल दो
थूक से ख्याली पकवान कब तलक तलते रहोगे यार


                                                  .. मनोज मैहता

Friday, 9 December 2016

मितरो खुश्क ठंड बुरी

गल्ल पराणी ठीक ह़ै कि काणीं बँड बुरी,
अपण इबकी एह़ मितरो खुश्क ठंड बुरी

समझ़ाणें दी गप्प, फूकी कजो लगाई बो,
तिन्नी भ़रोयो बजारे च करी त्ती झ़ंड बुरी

मिरक मारना बड़ा मयो मंह़गा पेयी गया,
तिसा दे भाऊआँ ते बज्जी ह़ाय फँड बुरी

डाक्टरें जाह़लु ते दसया शुगरा दा खतरा,
तदुँ दी ह़ी बझ़ौदी खसमाखाणी खंड बुरी

मत्थयाँ टेक्का भ़ौंयें चामुण्डा या भ़ौअणें
ढोणा ह़ी पौणीं अपण करमा दी पँड बुरी

पह़लें सारा ध़्याड़ा गीत तिसा दे गांदा था,
जुत्त- पल़ै ह़ोई ताँ बोलादा सैह़ ह़ै रँड बुरी|

मुर्देयाँ उपर नी खिल्लाँ-भ़ान्नाँ दी छँड बुरी,
अपर गुल्ली-डँडे दी भ़ुत्थी कनें भ़टँड बुरी

खाखी पर ह़ै उपड़ेया ऐ़ कोई डिजाईन नी,
खरा घ़सुन्न जवानें दा  पर बुड्ढे दी चँड बुरी
                                     .. मनोज मैहता

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...