Sunday, 26 February 2017
Monday, 6 February 2017
हा हा हाहाहा हा हा ... !!
चाहे उसको बदनाम करो या फिर झूठे मुकद्दमे ठोको
रात दिन यही चिंता है बाली को किसी तरह भी रोको
करवा दी कितनी नादानी नहीं बनेगी दूसरी राजधानी
न कोई सचिव न निर्देशक झूठी ही तुम तालियाँ ठोको
मैंने पाल रखे हैं जो प्यादे उनके भी मुझसे ही हैं इरादे
कामकाज भाड़ में जाये बस आँखों में धूल को झोंको
कॉलेज लो उप- तहसीलें ले लो पर सुनो तुम मेरे चेलो
जो मुझको महाराज पुकारे उसकी बात कभी न टोको
कर दूँ तुम्हारे वारे न्यारे झूठे ही सही लगाओ मेरे नारे
मेरे चमचे तो एैश ही करेंगे तुम मरो हिमाचल के लोको
बँद होगी तुम्हारी ही दलाली अग़र सत्ता में आया बाली
उसका रास्ता रोकने को मेरे साथ सारी ताकत झोंको
... मनोज मैहता
Friday, 3 February 2017
शख़्सियत को आपकी .. !!
शख्सियत को आपकी कर तार तार जाती है
इक तरफा मुहब्बत जीते जी ही मार जाती है
छोड़ो भी शौक ये, नवाबों की मानिद जीने के
मुकद्दरों से तमन्नायें तो हर सू ही हार जाती हैं
जँग से कुंद ये खंजर चमचमाता भी था कभी
वक्त के कहर से यूँ ही हर शै की धार जाती है
कभी मौका निकाल कर, मिल तो लिया करो
बढ़ती ही नहीं तो ताल्लुकात में दरार जाती है
ये फ़ाकाकशी की मार है याकि सफर की ऊब
मंज़िल के पास जा कर घटती रफ़्तार जाती है
.. मनोज मैहता
Game
To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...
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🌺 भृगु-वंश महाकाव्य गान 🌺 नारी-पक्ष बुआ इंदू आज के दिन यूँ फिरती इतराती, ज्यों कोकिला उछल-उछल कूकू करती जाती। बंदना, ऋतु, सीमा, नीतू की दे...
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--- ग़ज़ल चले भी हम, दौड़े भी हम, मगर शायद बेवक़्त तभी तो मंज़िल न मिली, थक गए हम कम्बख़्त। किसी ने राह दिखाई, किसी ने धोखा दिया, मगर न थमी ...