अपने राग अपने रंग
अजब तेरे है सारे ढंग
देखकर और भालकर
हम तो रह गए हैं दंग
पल में तौला पल में माशा
हर घड़ी अलग ही भाषा
अब सब्र के बांध टूटे
बह गई है सारी आशा
अगर हो मुझसे तंग
छोड़कर यह मूक जंग
कह दो याकि लिख दो
उठती नहीं वह तरंग
To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...