Saturday, 21 January 2017

आँखों में .... !!

आँखों में रँगीन से साये उभर आये थे
मुद्दतों के बाद हम फिर उधर आये थे

तेरे दीदार नें फिर लो ख़राब कर दिये
हालात अपने यूँ काफी सुधर आये थे

इससे पहले कि यह ऊँची उड़ान लेता
हम नादान दिल के  पर कुतर आये थे

कहना तो चाहते थे हर बात सच सच
जानें क्योंं सरे महफ़िल मुकर आये थे

हमें देखकर हँसना उनका वाज़िब था
मफलर छोड़ ओढ़  तेरी चुनर आये थे
                              .. मनोज मैहता

Wednesday, 11 January 2017

कामयाब कर गये... !! !!

शौक हमें देकर क्याें  उनके चाव मर गये
जरा मुस्कुराये तो वो समझे घाव भर गये

सब जानते हैं कि  अपने एैबों में शुमार है
बिलकुल नहीं या फिर  बेहिसाब कर गये

महफ़िल मे सुना है  उन्हीं के होते थे चर्चे
हुनर हमारे पर उनको ला-जवाब कर गये

ये मतलब-परस्तियाँ  या कि सर-मस्तियाँ
ख़ाम्खाह ही अपना  वक्त ख़राब कर गये

शबनम के चँद कतरों का ऐसा चला फ़ुसूँ
सूखे पत्तों की नस नस को शराब कर गये

दुनिया के मयखाने में  कुछ रिंद ऐसे मिले
शरीफों की शराफत को बेनकाब कर गये

लेते रहे उम्र भर जो  तेरी वर्बादी के सपने
वही यार मनोज तुझको कामयाब कर गये
                                  .. मनोज मैहता

Tuesday, 10 January 2017

अजमेर शरीफ

मुईनुदीन चिश्ती की दरगाह
नहीं है जी यह कोई सैरगाह

यहाँ जमता है हर रोज़ मेला
रोज दीवाली है रोज ईदगाह

गरीबनवाज़ के दर पे सुकूँ है
ॐ भी है, है भी बिस्मिल्लाह

हरे लिबास में सोया जगा है
यहाँ पे फकीरों का शहँशाह

Monday, 9 January 2017

हम अकेले हो गये... !!

सफ़र-ए-इश्क़ में न जाने क्या झमेले हो गये
लीजिये इक बार फिर से हम अकेले हो गये

ऐसा नँगा रक़्स किया वाद-ए-सबा ने देखिये
आदमी के मकाँ बिखरकर लो तबेले हो गये

यों भी कम ही फ़र्क है  मर्द और घोड़ों में जी
हरी घास ज्यों दिखी  दोनों झट नवेले हो गये

टी.वी चैनलों में आ गये जब से बाबा रामदेव
मीट मुर्गे से दुगने मंहगे  लौकी- करेले हो गये

मान भी जाईये हुज़ूर  तन पर न करिये ग़ुरूर
आप से अरबों पहले भी मिट्टी के ढेले हो गये
                                        .. मनोज मैहता

Friday, 6 January 2017

छोड़ भी दो .. !!

छोड़ भी दे तू अब ग़िले-शिकवे ये वफ़ादारी के
हुनर उसने चुराये हैं  इस कदर ही अश्आरी के

तूने इश्क इबादत समझी उसने फ़कत तफरीह
तेरे और उसके मायने,  अलग हैं दुनियादारी के

इतनी भी गहरी उदासी, न फिर ले कर सीने में
बहुत नायाब सिले मिलेंगे उसको इस गद्दारी के

उसको करने दे मौज तू जाकर पास अग़्यारों के
तुझे भी तो मिलेंगे मौके उसकी ख़िदमतगारी के

पलक भी हुईं बोझिल दिल था पहले ही चोटिल
पसंद नहीं उसको मनोज, अँदाज़ तेरे खुद्दारी के !!

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...