Friday, 6 January 2017

छोड़ भी दो .. !!

छोड़ भी दे तू अब ग़िले-शिकवे ये वफ़ादारी के
हुनर उसने चुराये हैं  इस कदर ही अश्आरी के

तूने इश्क इबादत समझी उसने फ़कत तफरीह
तेरे और उसके मायने,  अलग हैं दुनियादारी के

इतनी भी गहरी उदासी, न फिर ले कर सीने में
बहुत नायाब सिले मिलेंगे उसको इस गद्दारी के

उसको करने दे मौज तू जाकर पास अग़्यारों के
तुझे भी तो मिलेंगे मौके उसकी ख़िदमतगारी के

पलक भी हुईं बोझिल दिल था पहले ही चोटिल
पसंद नहीं उसको मनोज, अँदाज़ तेरे खुद्दारी के !!

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