Saturday, 21 January 2017

आँखों में .... !!

आँखों में रँगीन से साये उभर आये थे
मुद्दतों के बाद हम फिर उधर आये थे

तेरे दीदार नें फिर लो ख़राब कर दिये
हालात अपने यूँ काफी सुधर आये थे

इससे पहले कि यह ऊँची उड़ान लेता
हम नादान दिल के  पर कुतर आये थे

कहना तो चाहते थे हर बात सच सच
जानें क्योंं सरे महफ़िल मुकर आये थे

हमें देखकर हँसना उनका वाज़िब था
मफलर छोड़ ओढ़  तेरी चुनर आये थे
                              .. मनोज मैहता

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