कितनी गलत सोच है कि मुश्किलों का बोझ ले रहे हैं
असल में कुछ लोग आपके हालात की मौज ले रहे हैं
बैठे ही थे वो इसी तलाश में कि हंगामा तो कहीं बरपे
जायज़ा सुबह-दोपहर-शाम आपका तो रोज ले रहे हैं
नुकसान इसका होगा किसे यह भी काबिल-ऐ-गौर है
इस चीज की भी मेरे यारो क्या तनिक खोज ले रहे हैं
मतलब परस्त चंद, जो मँडरा रहे है इर्द-गिर्द इन दिनो
पता है मुझे भी सब कुछ कि क्या क्या लोभ दे रहे हैं
तेरा फ़र्ज़ है आगाह करना कि जागो और काम करो
बहुत हसीन ख़्वाब लोग इन दिनों ऐ मनोज ले रहे हैं ||
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