Tuesday, 27 December 2016

मेमना ख़ुद को शेर है पुकारता .. !!

कितनी बड़ी शेखी है  बघारता
मेमना ख़ुद को शेर है पुकारता

ईमानदारी का चोला ओढ़ कर
करोड़ों की जमीनें है डकारता

गीदड़ जैसी करके चालाकियाँ
बेगाने माल पर  हाथ है मारता

भगौड़ा एक जी 'कीर-ग्राम' का
दूसरों के कँधों पर  ललकारता

भोले धर्मशालियों को ठग कर
रिश्तेदारों के 'मुकद्दर' संवारता

तेरा रहनुमां ग़र होता 'काबिल'
तो एक भी पिछलग्गु न हारता
                    .. मनोज मैहता

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