धृतराष्ट्र की अनैतिक औलाद
करके ही रहेगी उसको वर्बाद
बना हिमाचल लो हस्तिनापुर
फैल चुका दिमाग तक मवाद
अर्जुन को रोकने की कोशिशें
अपना गणित या मूर्खी हिसाब
धर्मशाला जब बना है कुरुक्षेत्र
नगरोटा है पांडवों का शंखनाद
बज उठी हैं तीक्ष्ण रण-भेरियाँ
कायर स्वयंमेव करेंगे आंतर्नाद
कांपते हाथों से फैंकी गोटियाँ
द्यूत क्रीडा में भी खायेगा मात
सत्ता के नशे में पूरा अँधा हुआ
दो राज घरानों का बूढ़ा दामाद
षडयंत्रो से नही होगी हार-जीत
हम तो मारकाट को हैं आज़ाद
उठा गांडीव अचूक तू प्रहार कर
त्रिगर्त फिर जो करना है आबाद ||
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