Sunday, 16 August 2015

You are Adam not God

इतनी कठिन तो यह राह नहीं
पर चलनें की अब चाह नहीं

क्यों फिरता मैं रहूँ मारा मारा ?
जो किसीको मेरी परवाह नहीं

तय है कि यह किश्ती डूबेगी!
है इसका कोई भी मल्लाह नहीं

क्या बाँध बनेंगा इस नदिया पर
पानी का ही जिसमे प्रवाह नहीं

नाहक ही करते हो माथापच्ची
मानेंगा वो कभी तेरी सलाह नहीं

जमीं पर उतर आ, मान भी जा
आदम ही है तू अल्लाह तो नहीं

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