वर्कर तो भयग्रस्त हैं, नेता लोग मस्त हैं
अफसरों की मौज है और जनता त्रस्त है
चाहे हो काँग्रेस, हो चाहे फिर भाजपा
सरकार हिमाचल की मिलाजुला ट्रस्ट है
असली नकली की परख नहीं हुज़ूर को
बढ़ता ही जा रहा दोनों तरफ अनरैस्ट है
अपनें विधायक का पूरा विरोध कीजिए
डरनें की चिंता नहीं, साब का इन्ट्रेस्ट है
एक आध मन्त्री जो काम ठीक कर रहा
उसके बढ़ते भाव से, सी एम को कष्ट है
जम्हूरियत के मायनें लगता है बदल गए
जमानत न बचा सका, वो निगम अध्यक्ष है
जोड़ जुगाड़ करनें में पूरा जो दक्ष हो गया
प्राँत का प्रधान मित्रो,आज वो ही शख्स है
.................मनोज मैहता....................
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