तस्वीर अपनें महबूब की, गर्दन सें टाँग कर
वो रोता रहा उसके लिए, बद्दुआएँ माँग कर
वो शख्स था अजब, उसकी हरकतें गज़ब
इश्क़ किया उसनें, सब हदों को लाँघ कर
न जानें क्या बात थी, उस हस्ती अज़ीम में
खुद को रख दिया हमनें, उसीसे बाँध कर
छिप जा जरा बादलों की ओट में दो घड़ी
हम पे इतनी मेहरबानी, तू आज चाँद कर
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