बरखा दा देह़या तराड़ प्या , रूढ़ी सारा नराड़ गया
फिल्लाँ हँड्डंन अँग्गणें द्वारें, चौंनीं पास्सयाँ रँगाड़ प्या
कुरला बैंह़दे ह़ी आया रँग्गे, टिरे ल़्ह़ाह़ ता बैठ्ठे डँग्गे
बंडेर -जौगल़ पिंयाँ बृकटी ,खिड़ी खिड़ी पर प्ह़ाड़ प्या
नल़ौऊआँ दे घ़र गै दबोई, लुह़ाराँ दी मेयो चुड़ी रसोई
चाह़ंगाँ दा ह़िलकेरया छप्पर, राह़ड़ाँ दा ता लाह़ड़ गया
नाल़ू बगया बिच सड़का दे,साकड़याँ नें किंह़ियाँ जाणाँ
घ़रघ़याल़ू बुरे दौंलैं डरयो, उआरैं पारें सींह़ नाल़ प्या
खड़पे -सन्चूड़ गुस्से ह़ोयो, घु़ग्घ़ किछ चतन्न ह़ुण होयो
छाँगणाँ किंह़िंयां डर लगदा, कबल्ला चढ़ी एै़ बाड़ गया
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