Thursday, 13 August 2015

Betrayed -not-Shattered

आपनें तो सचमुच बड़ा ही, ज़ुल्म मुझपे यार किया,
जगाये ख़ुद अरमाँ मुझमें, फिर शर्तों पर प्यार किया ।

झूठे वायदे-झूठी कसम,बड़ी खास है तेरी यह अदा,
खाये धोखे मैंनें बारहा और फिर भी इँतजार किया  ।

मैं तड़पता कसमसाता हूँ और सोचता भी जाता हूँ ,
क्या ख़ता थी मेरी जो मुझे, बेवजह बेकरार किया  ।

है यकीँ मुझे तेरे चाहवान, शहर में और भी हैं बड़े ,
पर महज़ मैं ही एक हूँ, जिसनें तेरा एतबार किया  ।

उड़ाओ जी भर के मज़ाक,कसो और तुम फब्तियाँ ,
हूँ मगर बस एेसा ही मैं, जो भी किया बेशुमार किया

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