आपनें तो सचमुच बड़ा ही, ज़ुल्म मुझपे यार किया,
जगाये ख़ुद अरमाँ मुझमें, फिर शर्तों पर प्यार किया ।
झूठे वायदे-झूठी कसम,बड़ी खास है तेरी यह अदा,
खाये धोखे मैंनें बारहा और फिर भी इँतजार किया ।
मैं तड़पता कसमसाता हूँ और सोचता भी जाता हूँ ,
क्या ख़ता थी मेरी जो मुझे, बेवजह बेकरार किया ।
है यकीँ मुझे तेरे चाहवान, शहर में और भी हैं बड़े ,
पर महज़ मैं ही एक हूँ, जिसनें तेरा एतबार किया ।
उड़ाओ जी भर के मज़ाक,कसो और तुम फब्तियाँ ,
हूँ मगर बस एेसा ही मैं, जो भी किया बेशुमार किया
No comments:
Post a Comment