Friday, 28 June 2024

उतर गया हूँ मैं

तेरी आँखों की झील में उतर गया हूँ मैं
डूब ही जाने दे अब चूँकि मर गया हूँ मैं

लहू छलक छलक के मु़ंह हुआ है लाल
तुझे क्यूँ लग रहा है कि संवर गया हूँ मैं

उम्र ने दिखावटी यूँही ला दी है शराफत 
हर्गिज़ ना यारों जरा भी सुधर गया हूँ मैं 






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