जन्मदिन तुम्हें यूँ हर सू मुबारिक रहे
खत्म हों सदा के लिए ये कशमकशें
हम संग संग अब तो ताउम्र बस हंसें
फला फूला रहे तिरा बाग ओ बागवाँ
रब्ब भी तुझ पे रहे अब सदा मेहरबां
हरिक के सुख-दुख में तू शरीक रहे
जन्मदिन तुम्हें बस यूँही मुबारिक रहे
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
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