अपणेँ रिवाजाँ दिंयाँ अप्पु देणां लग्गे बल़ियाँ
गणेश पूजा सुरु करी, भुलाई छड्डियाँ रल़ियाँ
झ़ोलए़ू चुक्की लाई खिट, लयोणे तांईं सब्जी
खुखनुएं तां फुलणुएँ नें भ़रोईयाँ सब थल़ियाँ
माक, त्रपखी, ख्या बरखड़ी कख पता ह़ैईनी
नमन्त्रणा चवर्खां च, मनाेआ दियां रंगरल़ियाँ
छड्डी नें रिह़ाल़िया रखोणा लग्गा करवा चौथ
नोईयाँ मेमां अरो दरअसल गूगला नें पल़ियाँ
टेरियाँ छोरूआँ गल्लाँ, मीटाँ तां सराबा दियाँ
मां की सिरी मरान, अग्गीं सल़ाँ दियां वल़ियाँ
अद्धा ह़ी फकोया ह़ल्ली, इसजो ह़ी खाई जा
माखन्त इत्थु भी तोपा दे सींखाँ कनें डल़ियाँ
इन्हाँ दी जाणें खड, क्या ध़ूढ़ा- क्या त्रयांबल़ू
क्युंआं जो समझ़ी जाहन मटरे दियां फल़ियाँ
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