भतीजा एक विधायक का लिखता है मैहता चोर है
क्यों नहीं लिखेगा नई नई जवानी का ताजा जोर है
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एक बार पर पूछना चाचे से शादी किसने करवाई थी
किसने कार रोकी थी सुनेहड़ में और किसने छुड़ाई थी
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सीटू के फार्म में जब जुये में हार कर दुकान में रोता था
देसू की दुकान के पिछवाड़े से मैहता ही पानी ढोता था
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पूछना कभी जब बुआ पर मंडराया मौत का साया था
एफआरयू में प्लेटलेटस देने मैहता ही सामने आया था
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तेरे साथ मिलकर जो जो बहुत कविता जो बनवाते हैं
मैहते की बहियों में मूर्ख उन सबके कच्चेपक्के खाते हैं
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बाकी... बहुत लिखूंगा साकी ⌛⌛--मनोज मैहता
Tuesday, 10 April 2018
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भेड़िए मर्द का देखना ...
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
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--- ग़ज़ल चले भी हम, दौड़े भी हम, मगर शायद बेवक़्त तभी तो मंज़िल न मिली, थक गए हम कम्बख़्त। किसी ने राह दिखाई, किसी ने धोखा दिया, मगर न थमी ...
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