पुलिस को भी बुला लेता हूं
सबसे बड़ा ठहरा चूंकि गुंडा
चुटकियों में धमका लेता हूं
लोकतंत्र कैद है जेब में मेरी
सबकुछ डिलीट करा देता हूं
तुम तो हो बस भेड़ बकरियां
धाम रूपी घास चरा देता हूं
तुम्हारी हद फ़क़त है टांडे तक
ये अन्तिम बार समझा देता हूं
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
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