शून्य में ताकते तेरे नयन
व्यथित कर रहे हैं मेरा मन
चेहरे पर चिंता की रेखायें
और बदन की वो भंगिमायें
मैं नहीं हूँ पाषाण हृदय
कि न समझ पाऊँ वजह
तीस वर्ष हाँ तीन दशक
मिटा न पाये हमारी कसक
हमारा प्यार ये पाक मुहब्बत
मैं तेरा ही हूँ एै बेमुरब्बत
तू नहीं मैं तुझ बिन अधूरा हूँ
तुझ पर फ़िदा पूरा हूँ
लेगा नहीं कोई तेरी जगह
फिर कैसा सँशय कैसी विरह
कोशिश पूरी यह करूँगा
कि तेरे बाद ही मरूँगा
ताकि वियोग का ग़म
वो शोक व मातम
जो तुम सह नहीं सकती
मुझ बिन रह नहीं सकती
मेरा यही ईरादा है
और पक्का वादा है
तुझे सजा सँवारकर
सिंदूर अंतिम डालकर
प्राण तज दूँगा
तेरे सँग ही जलूँगा ...../मनोज मैहता
Wednesday, 17 February 2016
मेरा वादा है तुमसे
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