दोपह़राँ ह़ुंदिया ह़ुंदिया तिकर दिल मेरा खिली गया
बड़ियाँ ना नुकरां बाद बेरोजगारी भ़त्ता मिली गया
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
भेड़िए मर्द का देखना ...
भेड़िए मर्द का कुछ भी न कर पाएँगे, आँख के तेज़ से ही देखना मर जाएँगे। रग-रग में जिसके बहता हो सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...
-
🌺 भृगु-वंश महाकाव्य गान 🌺 नारी-पक्ष बुआ इंदू आज के दिन यूँ फिरती इतराती, ज्यों कोकिला उछल-उछल कूकू करती जाती। बंदना, ऋतु, सीमा, नीतू की दे...
-
--- ग़ज़ल चले भी हम, दौड़े भी हम, मगर शायद बेवक़्त तभी तो मंज़िल न मिली, थक गए हम कम्बख़्त। किसी ने राह दिखाई, किसी ने धोखा दिया, मगर न थमी ...
No comments:
Post a Comment