दरअसल दोनों को इन दिनों, वोटों की दरकार है ,
कल तक जो जानी दुश्मन थे आज पक्के यार हैं !
प्रधानी इक है लड़ रहा तो दूजा समिति भिड़ रहा ,
मनरेगा का पैसा हड़पनें को पर दोनों ही तैयार हैं !
जातीय समीकरण भी, हैं बिलकुल उनके हक में ,
अपनें अपनें वर्ग के तो दोनों ही स्वयंभू सरदार हैं !
पँचों व उपप्रधानों की तो मानों बाढ़ ही है आई हुई ,
हर इक को भरोसा दे रहे कि हम तो तेरे ही यार हैं !
जिला परिषद की सीट महिला को है आरक्षित हुई ,
इस बात से दोनों के सिर से, घट गया तमाम भार है !
किराये की टैक्सियों में, बहुतेरा सफर है कर लिया ,
खरीद पर्सनल गाड़ी हमनें, लेनी जी अबकी बार है !!
------------------------ मनोज मैहता ---------------------
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