सजग रहिये दोस्तो, पँचायती चुनावों के दिन हैं ,
झूठे भाषणों, मुस्कुराहटों व दिखावों के दिन हैं !
सारी उम्र अकड़ में काटी हैं अब सलाम कर रहे,
फिर सिर पर आ चढ़ेंगे, चँद झुकावों के दिन हैं !
खुदी में मस्त रहिये, सुनकर भी कुछ न कहिये,
उनके उलझनों या मानसिक तनावों के दिन हैं !
काम जिसने है किया बस उसको दीजिए दुआ,
संतुलन बनाये रखिये मन का दबावों के दिन हैं !
हाजमा और सेहत इकदम चुस्त दुरुस्त रखिये ,
मुर्ग- मुसल्लमों, दावतों और शराबों के दिन हैं!!
------------------ मनोज मैहता ---------------------
No comments:
Post a Comment