नामुराद दिल के सारे अरमान टूटे हैं ,
कुछ दिनों से इसके मेहरबान रूठे हैं !
यूँ तो दिखाने को बनते हैं पाक साफ ,
असल में उन्होंनें कई कद्रदान लूटे हैं !
आँखें खुश्क हो गईं, खामोश है ज़ुबाँ ,
जब से इश्क़ के साज़ो सामान छूटे हैं !
अँधेरा और गहरा गया मेरे आसपास ,
जिस दिन से घर के रोशनदान फूटे हैं !
कहना तो चाहा मगर कह न पाया मैं ,
कि उनके सभी मुरीद,चाहवान झूठे हैं !!
---------------- मनोज मैहता ---------------
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