Wednesday, 13 January 2016

लौह़ड़िया दी भ़याग...!!

बड्डी भारी ठंड ह़ै मइये, नौंह़णें जो मत बोलदी ,
बछाणें ते भ़्यागा ह़ी बा़र औणें जो मत बोलदी !

मांह़ मुँग्गां दी खिचड़ी ठैह़री के खाई लैंग्गा मैं  ,
बाझ़ी दात्तणीं रसयाल़ुयें,ओणें जो मत बोलदी !

राजड़यों गाई नें बिट्टियाँ, ठाल़ी दित्ता तोल़ा ह़ी ,
दिखयाँ मड़िये खीस्से ढलरोणें जो मत बोलदी !

तिज्जो पता ह़ै मिंज्जो,नजर ह़ै झ़ट्ट लगी जाँदी ,
नोह़ई ध़ोई त्यार ह़ोई, चमकोणें जो मत बोलदी !

नोंयें साल्लें मन्नयां सारयाँ नें ह़स्सी बोलना पौंद्दा .
दिख अपण कबल्ला ह़ी पल़चोणें जो मत बोलदी!!
----------------------- मनोज मैहता -------------------

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