Monday, 25 January 2016

Yes.. Today is Republic Day

अपनी अपनी दौड़ है
लूटने की होड़ है
लहरा दिया है ध्वज
जनता पर है असहज
अधिकारों पर तो जोर है
कर्तव्य लेख हैं महज़
कहने को लोकतंत्र है
लोग पर परतंत्र हैं
ये ऊँची ऊँची कुर्सियां
सब लूटनें के यंत्र हैं
सचिवों की प्रधानता
कहां है जी समानता?
जलसों में भीड़ जुट रही
जम्हूरियत है लुट रही
दिखावे को देशभक्त हैं
यूँ सत्ता पर आसक्त हैं
मन में हरा या भगवा है
तिरंगे का दिखावा है
जय हिंद का शंखनाद
हमी से छलावा है
मौसम ग़मग़ीन नीरस है
जी हाँ आज गणतंत्र दिवस है
-------- मनोज मैहता ----------

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