बेकार बहाना न यह करो कि तबियत खराब है,
हमारी सूरत बुरी सही उनकी तो नीयत खराब है
शैतान बेचारा यूँ ही आज तक होता रहा बदनाम,
असल में हब्बा के जाये की आदमियत खराब है
हर चीज़ का दोष मद के मारों को देते रहे हैं जो,
उन्हीं मासूम दिखने वालों की सूफियत खराब है
पढ़ता रहा रँगीं किताब छुपाके कुर्राने शरीफ में ,
वो अब दावा करता है कायदे शरीयत खराब है
हालात के मारों का हर शख्स यहाँ लेता है मज़ा,
सच में ख़ुदा तेरी यह ज़मीने मिल्कियत खराब है
-------------------- मनोज मैहता ----------------------
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