Thursday, 3 November 2016

गिदड़ शेरे पर चढ़ाई करा दा.. !!

अपणें मुँह़ें अपणीं ह़ी एड्डी बड़ाई करा दा,
जिंह़ियाँ कि गिदड़ शेरे पर चढ़ाई करा दा |

बरसातड़ नाल़े च रती के पाणीं जे बधया,
खप्प एह़़ पाईयो समुंदरे नें लड़ाई करा दा |

पिट्ठु बजनें ते जादा चुकाया मूह़्ंडया पर,
बणीं ग्या जागत खोत्ता कि पढ़ाई करा दा |

आलुआँ दे सारे बीज उजाड़ी छड्डे सूरां ह़ी,
दस मेया खेल़ाँ पाई कैसदी गुडाई करा दा |

लोक्काँ जो आदत ह़ै भेड़- चाल चलने दी,
कजो बेह़ली ह़ी मोआ दौड़-दड़ाई करा दा |

मैह़ता मेया नियाँ ता खरदियाँ ह़ी जादियाँ ,
कजो कंधाँ लकोल़ूआँ दी रगड़ाई करा दा |
                                    .. मनोज मैहता

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