Monday, 12 June 2017

पानी...!!

पानी...!!

चश्मों में लो इक बार फिर से भर गया पानी
नज़र--शक से देखना, मुझे कर गया पानी

वैसे तो बग़ैर इस के यक़ीनन जीना मुहाल है 
उसको पूछो जिसके सर तक भर गया पानी 

बेरंग तो उनको है बिलकुल नापसंद याखुदा
हुआ लाल तो रिंदों को, मस्त कर गया पानी 

जब कभी भी हुआ, यकायक दीदार--यार 
कर बदन को बेतहाशा, तर--तर गया पानी 

चंद कोंपलें निकली तो थीं बाग़--वीरान में 
कल रात उनके ऊपर से ही गुज़र गया पानी 

अँबर का मन भी था के निकाल फैंके बाहर 
तुफान-अो-बिजलियों से पर डर गया पानी 

....मनोज मेहता...

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...