Saturday, 3 June 2017

बाल़द (बैल)

भ़ुये खाई नें सुक्के बाल़द
आये ट्रेक्टर  मुक्के बाल़द

मुँह़्ह़ाँ छिक्के दित्ते बह़न्नीं
दिन भ़र रह़ै भ़ुख्खे बाल़द

ह़ल़ां- ज़ुँगलेयां दे  भा़राँ नें
दिख्खा कैसे सुक्के बाल़द

सजाई चित्री  बणाये नन्दी
बंड्डंन पुच्छाँ रुक्के  बाल़द

खुंड्डाँ पुट्टी जाह़लु जे न्ह़ठ्ठे
छलैड़े च भ़ी लुक्के बाल़द

मरने परँत भ़ी कम्में  आये
बणें बैल्टां कनें जुट्टे बाल़द

खल्लाँ पेड़ी करी नंगे कित्ते
टोक्के नें करी टुक्के बाल़द

खाद्दे कुत्तयाँ, गिदड़ाँ इल्णीं
माह्णुएं जे नीं चुक्के  बाल़द
                .. मनोज मैहता

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