Wednesday, 22 October 2025

शेख फरीद - - - - मौत पर


(मौत — फरीद की नजर से)

मिट्टी नू छोटी ना जाणीं,
एही जिंदगी दा राज है।
जिथों आया, ओथे जाणां,
एही रब दा अंदाज है।

फरीदा, मौतों ना डर,
एह वी रब दी रहमत ए।
जो रब विच रच गया पूरा,
उही जन्नत दी नेअमत ए।

अहंकार दी जे कंध गिरा लै,
उही मौतों पार लंगदा ए।
जिस ने आपा मार लिआ अपना,
उही हक़ विच रंगदा ए।

जद “मैं” मर गया अंदरों,
उस वेले जीवन जड़म्दा ए।
जो प्यार विच रब लै रलिआ,
उह सदा आबाद रहिंदा ए।

मौत ना अंत ए, ना हनेरा,
एह नूर दा इक दरिया ए।
बूँद मिली जद सामुंदर विच,
विसाल-ए-हक़ दा जरिया ए।



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