Saturday, 18 July 2015

TEEN-age-Romance-Kangra-conclusions drawn

कजो पाया रोल़ा अरो, कजो तँग कित्तया? 
बझ़ाई हुण ही लाटुए मैं भित्त लाई दिंत्तया ।

गौ ता उह़िंयाँ मेरा भी था दो घुट्ट लाणे जो,
तबीज गले ताम्बे दा , है चेलें पाई दित्तया ।

ठँडी ठँडी ओबरी बडी याद ओंदी तोंदिया,
टपरु सैह़ पराणां म्यो, सयालें ढाई दिंत्तया ।

कुथु पांणें लेण हुण ता कुथु पाणें मन्दलु ?
कैखी जल़्या मार्बल अंगणें बछाईं दिंत्तया । 

मत जाँदा छोरुआ, बजारे हुण किह़ला तू ,
तिसा दे भाऊंआँ तेरा, पहरा पाई दिंत्तया ।

क्या ह़ोणें जुये ह़ुण, ह़ोणियाँ क्या कौड्डियाँ 
हारीअप्पु पैसयाँ, काढ़डू जताई दित्तया |!
----------------- मनोज मैहता ----------------

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...