Sunday, 19 July 2015

Getting-older-jawani-hindi-gazal

ज़हन में चँद शिकायतें फिर उभरने लगीं
तेरी बातें मुझे अब सच में अखरनें लगीं

झाँक रहे हैं झरोखे से मुहल्ले के नौजवाँ
इन्हें कैसे पता कि तू फिर से सँवरने लगी

सोचता हूँ कि जोरआजमाईश मैं भी करूँ
है जवानी कम्बख्त मगर अब ढलनें लगी

आँखें और हसरतें कभी भी न वश में रहीं
वो फिसलती रहीं और वो मचलनें लगीं

तेरा यौवन, ऊपर से मौसम का मिजाज़
आग लगता है हर जगह ही लगने लगी

याद आया तेरा गदराया सँगमरमरी जिस्म
साँस मद्धम सेअब धौंकनी सी चलने लगी

1 comment:

भेड़िए मर्द का देखना ...

भेड़िए  मर्द  का   कुछ भी  न  कर  पाएँगे, आँख  के  तेज़  से ही  देखना  मर  जाएँगे। रग-रग में जिसके  बहता हो  सत्य का लहू, उसके दुश्मन देखना ...