Sunday, 26 July 2015

Yeh-Na-Socha-tha Kabhi

साथ्थे छड्डी तू जे चल्ली, एह़ सोच्या मैं किह़िंयाँ जींगा?
मते पीते घ़ुट्ट सबरे दे पर जैह़र गमाँ दा किह़िंयाँ पींगा ?

तैं ता झ़ट ह़ी बोल्ली दित्ता,अपणां रस्ता ल्यैं पकड़ी मैं
सोच्या नीं पँड्ड याद्दाँ दी पर मुँड्डे चुक्की किह़िंयाँ नींगा?

काल़जे च पीड़ ह़ै मिस्णीं, लुकाणी ह़स्सी़ नें कितणीं ?
दिले दे टोटे टोटे ह़ोए, कितणां गठगा कितणां स़ींगा ?

बड़े जत्नाँ नें फूक्या मुर्दा अपणें दिले दे अरमानां दा ,
अद्ध़े ध़ामें रुकी गई मोटर, कुथु हुंण मैं पिंड्डाँ दिंग्गा ।।
-------------------------मनोज मैहता ----------------------

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