ज़हन में चँद शिकायतें फिर उभरने लगीं
तेरी बातें मुझे अब सच में अखरनें लगीं
झाँक रहे हैं झरोखे से मुहल्ले के नौजवाँ
इन्हें कैसे पता कि तू फिर से सँवरने लगी
सोचता हूँ कि जोरआजमाईश मैं भी करूँ
है जवानी कम्बख्त मगर अब ढलनें लगी
आँखें और हसरतें कभी भी न वश में रहीं
वो फिसलती रहीं और वो मचलनें लगीं
तेरा यौवन, ऊपर से मौसम का मिजाज़
आग लगता है हर जगह ही लगने लगी
याद आया तेरा गदराया सँगमरमरी जिस्म
साँस मद्धम सेअब धौंकनी सी चलने लगी
तेरी बातें मुझे अब सच में अखरनें लगीं
झाँक रहे हैं झरोखे से मुहल्ले के नौजवाँ
इन्हें कैसे पता कि तू फिर से सँवरने लगी
सोचता हूँ कि जोरआजमाईश मैं भी करूँ
है जवानी कम्बख्त मगर अब ढलनें लगी
आँखें और हसरतें कभी भी न वश में रहीं
वो फिसलती रहीं और वो मचलनें लगीं
तेरा यौवन, ऊपर से मौसम का मिजाज़
आग लगता है हर जगह ही लगने लगी
याद आया तेरा गदराया सँगमरमरी जिस्म
साँस मद्धम सेअब धौंकनी सी चलने लगी
जी
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