Monday, 5 October 2015

Sweet winter creeps slowly

सीरदे स्याल़े दी मिट्ठी, ठँड तनें लग्गा दी ,
गायी दी सगन्द मेयो, अग्ग मनें लग्गा दी ।

छड्डी नें गद्धेरनें गद्दी, जोत्तीं लोह़्णां लग्गे,
खीरयाँ ता दुँडुआँ नें शान ध़णें लग्गा दी ।

सूई जे पइयां किछ ध़ारा ध़ारा लोह़ंदियां,
अपणीं ह़ी ह़ाख जल़ी, बुरी थणें लग्गा दी।

पट्टु,कम्बल़,लेह़्फ, बछाणें लग्गे सजणां,
क्याड़िया दी मैल जाई नें सरैह़्णें लग्गा दी।

चणें ता रयोड़ियाँ ह़ुण ख़ुड़ी गईयाँ बोरियाँ,
खरोड़याँ खाणें जो रूह़ बड़ी कनें लग्गा दी ।
-------------------मनोज मैहता ----------------

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