Thursday, 3 March 2016

Don't always think of winning..!!

जितणें दी ह़ी नीं सोचणीं मुआ कद्दी कद्दी ता ह़ारना पौंह़ंगा
सव़ाले पर मत सव़ाले दाग्गें,जवाब भ़ी ता न्ह़्याल़्णाँ पौंह़ंगा

मन ता ठह़रया रमता जोगी, बाझ़्झ़ी जंग्घ़ाँ मुलखें ह़न्ड्डदा
बज्झ़दा नीं एह़ इक्की खुँड्डें, कुत्थी ता कम्में लाणाँ पौंह़ंगा

मन्नयां ह़ै चोरे ते पँड काह़ल़ी, मत ठोक्कें तू मिंज्जो गाल़ीं
बोल चरड़े तां जवाब करड़े, एह़ भ़ी क्या समझाणां पौंह़ंगा

छैले़ दिख्खी बचारी भ़ुल्ली,बाह़ीं सरैह़णें ता चुत्तड़ चुल्ह़ी
जे बचणां ह़ोये इसा गती ते, अपणाँ आप समझ़ाणां पौंह़ंगा

टाह़े पटाये लिख्खदा रैह़ंदा, कद्दी नीं मोआ निचला बैंहदा कुसी दी नीं सुणदा मैहता लाड़िया जों ह़ी जरकाणां पौंह़ंगा
----------------------मनोज मैहता-------------------------

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