देखिये कागज के नोटों को, किस कदर संभाला जाता है,
पर हार-जीत तय करने को, सिक्का ही उछाला जाता है।
दुनिया का अजब दस्तूर है यह, तरीका भी मशहूर है यह,
भविष्य की हद तय करने को, इतिहास खंगाला जाता है।
जो जितना मन को भाता है, उतना ही सताया जाता है,
गुलाबों को अर्क की ख़ातिर ही, पानीं में उबाला जाता है।
रूप दमक पाने के लिये,तिल तिल कर पड़ता है जलना,
सोनें को पिघलाकर ही एै यारो! गहनों में ढाला जाता है।
माना यह कि मदद करके, सुकून सा मिलता है दिल को,
पर भूख तभी ही मिटती है, जब मुँह में निवाला जाता है।।
-------------------------- मनोज मैहता------------------------
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