Monday, 28 March 2016

Let me exist as I am....!!

अपनी धुने- सनक में मस्त हूँ, एै ख़ुदा यूँ ही रहने दो ,
जलनें वालों को जलनें दे, कहनें वालों को कहने दो |

थोड़ा छलकनें पर ही जब, रूह को मिलती है ठंडक ,
फिर खुलकर मेरी आँखों से, ग़म का दरिया बहने दो |

नासूर जो फैला सीने में, कुछ मज़ा आया है जीनें में ,
न कोई मरहम न ही दवा, बस मीठे दर्द को सहनें दो |

जुल्मों को हर हद तक, सहनें का जु़नूँ है छाया हुआ ,
कुफ़रों की आँधी आनें दो, कहरों को मुझपे ढहने दो |

साँसों को मद्धम कर दो, दिमाग को चाहे सुन्न कर दो ,
यादें मुलाकात के लम्हों कि पर इसमें ताज़ा रहनें दो ||
---      ---      ---      ---      ---       --- मनोज मैहता

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