Saturday, 2 April 2016

Foundation stones bear the weight..!!

माना कि मेहराबें -मीनार, इमारत की शान होते हैं ,
पर इसका सारा बोझ तो नींव के पत्थर ही ढोते हैं |

जिनकी वज़ह से महफिलों में खिलती हैं मुस्कानें ,
वोही शख्स अकेले में अक्सर फूट फूट के रोते हैं |

चर्चे बड़े ही होते हैं मजबूती की जिन दरख़्तान के,
सारी ताकत के अँश तो उनकी जड़ों ही में होते हैं |

दस्तूर पर दुनिया का यही, सबसे अज़ब है दोस्तो ,
भरे पेट आराम से हैं और भूखे फसल को बोते हैं |

छोड़िये इन शायरों की, वाहवाही करना बार बार ,
फ़ालतू- कम्बख्त लोग ये, खुली आँखों से सोते हैं ||
----     ----     ----     -----    ----   -- मनोज मैहता

No comments:

Post a Comment

Game

To win despite the odds remains my only aim, For life has dealt us every breath without a name. The cards were turned a little late, a littl...