Thursday, 14 April 2016

मेरा धल़ूँ ग्राँ...!!

उआर बो बग्गदी खड्ड ध़रूँ, पारले पासे झ़ूटण नाला़ ,
मट्ठी मट्ठी पौड़ भी बग्गियो,ध़ल़ूँ ग्राँ बड़ा भाग्गां वाल़ा |

इक्क बन्नां तगड़ोटिया नें झ़ूंदा, दुऐ पास्से सेराथाना ,
झ़ियोल, डिकटु बूह़ले पासें, पारलिया ध़ारा बरवाल़ा |

भ़रोया लाकड़ियां नें रिन्नां, कुफ्री पाया सैंणियां डेरा ,
मराल़ुदेव ल्या टावरां घ़ेरी ता लाह़ड़ मह़ल्या द्रगालाँ |

चकबणें बैठ्ठियो नैणांदेवी, छैल़ मँदरू ऊचिया ध़ारा,
खट्टे बस्से खड्डा कंड्ढे, पटियालकड़ बसाई पटयाल़ां |

भ़लौ़च पुजी गै भ़रोबड़ी, जठियाल़े रैह़ धरुईं बक्खे ,
म्हा़से बज्जदे रैह़ बाज्जयां, बांदर जाई बड़े घराल़ा |

बन्ह़ें दे रुख्खाँ नें बल्ह़ड़, लग्गे गोल्फ ग्राऊंड प्यारा ,
फौजियां कंड्डे तारां लाई, पाई दित्ता म़ांजो परकाल़ा||

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