Wednesday, 31 December 2025

पिंडदान मन्त्र

ठीक है। नीचे सनातन धर्मानुसार पिंडदान की संपूर्ण पारंपरिक विधि क्रमवार दी जा रही है। यह विधि गया / हरिद्वार / प्रयाग—तीनों में मूलतः समान मानी जाती है (स्थानीय आचार्य उच्चारण में थोड़ा अंतर कराते हैं)।
🔱 पिंडदान की संपूर्ण विधि (मंत्र सहित)
1️⃣ मंगलाचरण (आरंभ में)
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ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ श्री गणेशाय नमः।
ॐ श्री गुरुभ्यो नमः।
2️⃣ संकल्प मंत्र (मुख्य)
(दक्षिणमुख होकर, हाथ में जल–तिल–अक्षत लेकर)
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ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
अद्य श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य
विष्णोः आज्ञया
ब्रह्मणः द्वितीय परार्धे
श्वेतवाराह कल्पे
वैवस्वत मन्वन्तरे
अष्टाविंशतितमे कलियुगे
प्रथमे चरणे
जम्बूद्वीपे भारतवर्षे
आर्यावर्ते अमुक प्रदेशे
अमुक तीर्थे

अमुक गोत्रोत्पन्नस्य
अमुक नाम्नः पितुः / मातुः / पितामहस्य
प्रेतमोक्षार्थं
पिंडदानं करिष्ये।
(अंत में)
👉 ॐ तत्सत्।
3️⃣ पितृ-आह्वान मंत्र
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ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
ॐ पितामहाय स्वधा नमः।
ॐ प्रपितामहाय स्वधा नमः।
4️⃣ पिंड अर्पण मंत्र (प्रत्येक पिंड पर)
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इदं पिंडं
अमुक नाम्ने पित्रे
स्वधा नमः।
(तीन पिंड हों तो—पिता, पितामह, प्रपितामह के नाम से)
5️⃣ जल-तर्पण मंत्र
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ॐ पितृभ्यः स्वधा।
ॐ पितृभ्यः स्वधा।
ॐ पितृभ्यः स्वधा।
6️⃣ अक्षय तृप्ति मंत्र
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अक्षयं भवतु।
अक्षयं भवतु।
अक्षयं भवतु।
7️⃣ क्षमा प्रार्थना (अत्यंत आवश्यक)
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मंत्रहीनं क्रियाहीनं
भक्तिहीनं जनार्दन।
यत् कृतं तु मया देव
परिपूर्णं तदस्तु मे॥
8️⃣ अंतिम शांति मंत्र
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ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।
🌾 विशेष मान्यताएँ
पिंड में चावल, जौ, तिल, घी, शहद का प्रयोग श्रेष्ठ माना गया है।
पिंडदान अमावस्या, पितृपक्ष, गया-श्राद्ध, हरिद्वार में विशेष फलदायी होता है।
कहा गया है—
“गयाश्राद्धं विनाऽन्यत् नास्ति”
(गया में किया पिंडदान सर्वश्रेष्ठ माना गया)
यदि आप चाहें तो मैं
✔ केवल गया-श्राद्ध की विशिष्ट विधि,
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