मनें दे फफोल़याँ बठयाल़दा ही रह़ी गया ,
मोटर गई चली, मैं निहाल़दा ही रह़ी गया .
ह़ुस्नें दे बजारे बिच, झ़पट्टयां मारी गै सारे ,
मैं नौल़ाँ सांह़ी यारो , ताल़दा ह़ी रह़ी गया.
चोरिया दी बँड्डी नें तिन्ह़ां खीस्से लैये भ़री,
रात थी न्ह़ेरी मैं लम्फे बाल़दा ह़ी रह़ी गया.
नौंयाँ सूटाँ बूटाँ नें मितरां टौह़र थी कड्ढियो,
मैं पराणें फालड़ुयाँ ,खँगाल़दा ह़ी रह़ी गया.
मीटाँ दारुआँ छक्की, मस्तदे रैह़ सब भ़ाऊ,
सैह़ दुक्कु तिक्कुआं संभ़ाल़दा ह़ी रह़ी गया.
बड़े नखरयाँ दस्सी ह़ंड्डदी रह़ी ह़ोरसी नें सैह़
'मैहता' बचारा काल़जे जाल़दा ह़ी रह़ी गया ..
------------------मनोज मैहता ------------------
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